शिक्षामंत्री श्री तावडेजी ने दिया दूसरा झटका…

कंपनियों को कॉर्पोरेट स्कुल खोलने की अनुमति देने के बाद, महाराष्ट्र  राज्य  में शैक्षिक ट्रस्ट (एजुकेशनल ट्रस्ट) को अपना शिक्षा बोर्ड शुरू करने की, अपना पाठ्यक्रम और परीक्षाओं का आयोजन खुद करने की अनुमति देने की  प्रक्रिया पर विचार परामर्श चल रहा है  ऐसा शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े ने कहा।

जिस प्रकार  स्वायत्त कॉलेजों और निजी विश्वविद्यालयों  में यह प्रणाली काम करती है उसी प्रकार अब स्कुलो में भी इस प्रणाली को लागु करने के लिए  राज्य के शिक्षा विभाग में चर्चा चल रही है.

इसका मतलब अब प्राइवेट स्कुलो को उनको खुदके बोर्ड एवं पाठ्यक्रम को बनाने की इजाजत मिल सकती है इसके परिणाम स्वरुप सरकारी स्कुल और निजी स्कुलो को पाठ्यक्रम अलग अलग हो सकता है.

देखिये इस निर्णय से हमारे सरकारी स्कुलो पर क्या असर होगा:

  1. सबसे पहली बात यह है की इसमें फिर एक बार सरकारी और निजी स्कुलो में गुणवत्ता हेतु प्रतियोगिता होगी.दिखने में ये बात सीधी लग रही होगी लेकिन इसका परिणाम बहुत बुरा हो सकता है.
  2.  प्रतियोगिता में  सरकारी स्कुल हमेशा पिछड़े ही है ऐसा बार बार साबित होते आया है, छात्रो को निजी स्कुल में दाखिला दिलाने के लिए डोनेशन की नयी कम्पटीशन शुरू हो जाएगी जिसमे आर्थिक स्तर पर दुर्बल माता पिता ही हार जायेंगे.
  3. सरकारी स्कुल और निजी स्कुल , निजी बोर्ड इनके इस दरार के कारन राज्य में पाठ्यक्रम में बहुत दुरी बन जाएगी जो शिक्षा क्षेत्र में अपेक्षित नहीं है.
  4. इन स्कुलो में दाखिला मिलने के लिए छात्रो पर अध्ययन का दवाब हमेशा रहेगा और इसमें  कोचिंग क्लासेस अपनी तिजोरियों को भरते रहेंगे.

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गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा के हम इस निर्णय का स्वागत तो करेंगे पर सवाल ये है की  सरकारी स्कुलो में पढ़ने वाले छात्र इन स्कुलो में  पढनेवाले छात्रों से स्पर्धा कर पायेंगे?

इस पर आपकी क्या राय है? हमे comment box मे जरूर बताए.

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